विद्यालय में संस्कारक्षम वातावरण
ऋषियों, मनीषियों प्राचीन ज्ञानी वैज्ञानिकों, संतों तथा महापुरूषों के चित्र भी की शोभा बढ़ाये तो "The...
वातावरण सृजन के लिये भौतिक संसाधन
विद्यालय के प्रवेश द्वार के निकट अखण्ड भारत का मानचित्र बना हुआ दिखाई दे यह व्यवस्था होनी चाहिए। स्वामी विवेकानन्द जी के शब्दों में आगामी पचास वर्षों तक सभी देवी देवताओं को अलमारी में बंद कर रख दें, केवल एक ही देवी की पूजा करे वह है भारतमाता! विद्यार्थियों में जीवन मूल्यों के सृजन के लिए देशभक्ति की भावना का उदय ही हमारी प्रथम वरीयता होनी चाहिए।
विद्यार्थी विद्यालय में प्रवेश करते ही भारतमाता के चित्र को नमन कर आगे बढ़े और मन, मन यह गुनगुनाते चलें।
भारत माता का यह मन्दिर नाता भाई-भाई समझे मां की प्रसव वेदना वह है लाल माई का कक्षा-कक्षों में तथा इसके बाहर बरामदों तथा सुभाषित लिखें हो सुन्दर अक्षरों में प्रेरणादायक वाक्य सूक्तियां
आसन के लिए भी रेखांक्ति किये चाटर्स भी चाहिए। ऋषियों, मनीषियों प्राचीन ज्ञानी वैज्ञानिकों, संतों तथा महापुरूषों के चित्र भी की शोभा बढ़ाये तो "The wall should speak and the stones should sing दिवारें बोले और पत्थर गीत गाए।
विद्यालय में साधना कक्ष मौन प्रार्थना के लिये एक पुण्य स्थल है रिक्त अन्तरों में कक्षा वहां जाकर मौन अथवा मुखर प्रार्थना कर सकती है। साधना कक्ष का वातावरण ऐसा हो कि प्रवेश करते ही आंखे बंद होने लगे। इस प्रक्रिया से अन्तयात्रा प्रारम्भ होती है बटिंगमन यात्रा तो केवल यात्रा है और अन्तयात्रा तीर्थ यात्रा है। साधना कक्ष दोनों यात्राओं का संगम स्थल है। हृदय की शुद्धता से विद्यालय का कार्य आरम्भ करें।
विद्यालय का पुस्तकालय हमें पाठ्यक्रम की पुस्तकों से भी अधिक सीख दे सकता है? यदि हम इसके महत्व को समझें यह नित्य नूतन ज्ञान का भंडार है। पुस्तकालय में एक कोना नैतिक शिक्षा से सम्बन्धित पुस्तकों का रहने से इस विषय के पठन-पाठन के लिये सुविधा रहेगी।
हृदय श्रव्य उपकरण- टेप रिकार्डर तथा सलाईडज से विद्यार्थियों को अच्छे चित्र, अच्छे गीत तथा अच्छी कहानियां, या देखने सुनने के अवसर प्राप्त होंगे और इनका व्यक्तित्व विकास में योगदान रहेगा।
• जीवन मूल्यों का अन्तर्निवेश
बालक किसी को करते हुए देख कर सीखता है। आदेश तथा उपदेश से नहीं वह मन के सन्देश को सुनते हैं। ग्रहणशीलता के लिये उदाहरण प्रस्तुत करना कहीं अधिक अच्छा है।
जीवन मूल्यों के अन्तर्निवेश के लिये सहपाठ गतिविधियों की योजना तथा क्रियान्वयन विद्यालय में बालकों के मानसिक विकास के आवश्यक सोपान है :
● खेल।
● संस्कारक्षम खेल।
● साहसिक क्रियाएँ
● आग के गोले में से भाग कर बाहर जाना।
● युद्ध तथा सुरक्षा का अभ्यास
● जुडो कराटे ।
● चार से दस तक विद्यार्थियों को बिठा कर सन्तुलित मोटर साइकिल चलाना।
● स्तूप बनाना।
● सामाजिक उत्पादक क्रियाएँ
● कबड्डी
● रिक्तान्तरों में पुस्तक पेटिका कक्षाओं में ले जाना और पुस्तके एकाग्रचित हो कर पढ़ना।
● योग कक्ष, आसन तथा योग अभ्यास
● कक्षा कक्षाओं का नामकरण (प्रान्त, नदी, पवित्र नगर, सन्तों, वैज्ञानिकों तथा महापुरूषों के नाम से रखना।
● संगीत (एकल, समूह कक्षा, अन्तः कक्षा, प्रतिस्पंद्रा विद्यालय गीत, अभिन्य गीत, छन्दवेश
तथा पृष्ठ भूमि से गीत)।
● प्रतियोगिताएं (कविता, भजन, चित्रकला, छन्द्रवेश, वाद-विवाद पत्र पाठन, निबंध
लेखन) हस्तलिखित पत्रिका
● संसद की कार्यवाही का मंचन
● तत्काल विषय प्रस्तुति
● कविता बनाना।
● समाचार समीक्षा।
प्रार्थना सभा
प्रार्थना विद्यालय के कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह आचार्यो तथा विद्यार्थियों के लिये आत्मनिवदेन, आत्मसमर्पण तथा आत्मवलोकन के लिये स्वर्णिम अवसर है। प्रार्थना सभा के अनेक अंग तथा उपांग है ३५ मिनट की प्रार्थना का उपयोग सद्भावना तथा शुद्धमन से करना चाहिए।
प्रार्थना में समय विभाजन आवश्यक है। यह समय बोझल न होकर लचीला होना चाहिए। प्रार्थना सभा में निम्नलिखित कार्य करना अपेक्षित है :
● विद्यालय प्रार्थना (मुख्य प्रार्थना के साथ दैनिक कोई एक और प्रार्थना )
● विद्यार्थी पिछले दिन के अच्छे अनुकरणीय कार्यों को सुनायेंगे।
● आसन तथा योग क्रियाए (सामूहिक)।
● मौन प्रार्थना |
● गीत समूहगीत कक्षागीत विद्यालय गीत (क्रम से)।
● आज का विचार।
● समाचार समीक्षा ।
● महापुरूषों की जयन्तियां तथा बलिदान दिवस मनाना।
● प्रतियोगिताएं
● प्रेरणादायक प्रसंग
● राष्ट्रीय तथा अन्तराष्ट्रीय दिवस
● बच्चों को सम्बोधन (आचार्य, प्रधानाचार्य तथा अतिथि)
● प्रश्न मेरे उत्तर आपके।
● सामूहिक बाल सभा
समाज सेवा कार्य
● सेवा कार्य प्रभु की सेवा- नर सेवा, नारायण सेवा
● समता, ममता, क्षमता, नम्रता गुणात्मक विकास
● विवेकानन्द पुस्तक बैंक।
● विवेकानन्द औषधि बैंक।
● विवेकानन्द आर्थिक सहायता कोश
● जन्मदिन दीप तथा दान दिवस के रूप में मनाना
● पड़ोस की मलिन बस्तियों का गोद में लेना उनकी भलाई के कार्यों को हाथ में लेना।
● संस्कार केन्द्र
● अभाव ग्रस्त बच्चों के लिये कपड़े, पुस्तकें, स्टेशनरी, खिलौने आदि एकत्रित करना और बांटना। ● श्रमनिष्ठा
● सहकारी भण्डार, कैन्टीन संचालन
● राष्ट्रीय आपदा में सहायता शिविर तथा सहायता के लिये सामग्री भेजना।
● वृक्षारोपण
● अवकाश के दिनों में चिकित्सालय जाना।
● वरिष्ठ नागरिकों के साथ समय व्यतीत करना।
● पर्यावरण की शुद्धि का प्रयास
● प्राथमिक चिकित्सा सहायतार्थ सीखना और सेवा प्रदान करना
● दीपावली, होली- सामाजिक समरसता के लिये मनाना
● रक्तदान शिविरों का आयोजन
● गतिविरुद्ध बालको को पढ़ाना।
● पानी का अपव्यय नहीं करना।
● बिजली का उचित उपयोग
● झूटा नहीं छोड़ना।
● पक्षियों के लिये पानी तथा अन्न की व्यवस्था ।
● दीपावली पटाखों के बिना, होली प्राकृति रंगो के साथ।
कथा और कहानियां
कथा और कहानियां की बालकों के जीवन पर अमिट छाप रहती है। न जाने कितने ही मूर्धन्य विद्वान, क्रान्तिकारी, छत्रपति राज श्रेष्ठ आचार्यो व दादी और मां की कहानिया, प्रेरणादायक प्रसंग जीवनियों की कथाएं सुनने और को है। विद्यार्थियों को कथा कहानियां सुनाएँ कहानियों को निम्नलिखित श्रेणियों में बाटा जा सकता है
● धार्मिक और ऐतिहासिक |
● शिक्षा प्रद कहानियाँ
● तेजोपुंज व्यक्तियों की जीवन गाथाएँ
● दैनिक जीवन से सम्बन्धित कथाएँ ।
● टेप्स, सलाईडज, बार्टस - फिल्मज के माध्यम से
● परिस्थितियों से जूझते श्रमनिष्ठ व्यक्तित्व |
● पटू पर अंकित कहानियां।
● रेखाचित्र कथाएँ
● पुतली द्वारा कहानियाँ ।
● अधूरी कहानी को पूर्ण करना
● मलिन बस्तियों का सर्वेक्षण द्वारा कथा। परिस्थितियों में रहना और निदान करना।
● बुरे कार्य आत्मावलोकन और पश्चाताप
● क्रान्तिकारियों, महापुरूषों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों के प्ररेणादायक प्रसंग
● रामायण, महाभारत, पुराण तथा उपनिषद की कहानियाँ
नेतृत्व विकास
विद्यालय गतिविधियों का आलय होना चाहिए। गतिविधियों के आधार पर हम बालकों की अन्तनिहित शक्तियों, कुशलताओं तथा प्रतिभाओं के बाहर लाते हैं और इस प्रक्रिया से उसमें नेतृत्व विकास होता है। हमारा नाद है प्रत्येक विद्यार्थी के लिये उसकी रूचि अभिरूचि के अनुसार किसी भी कार्य का दायितव देना। इस हेतु विद्यार्थियों की रूचि का कार्य निम्नलिखित है
१. बाल सभा
२. सदन कार्य पर
३. नायक प्रणाली
४. अन्ताक्षरी
५. विद्यार्थियों का विद्यालय, विद्यार्थियों द्वारा कार्य विद्यार्थियों के लिये विद्यालय School of the students school by the students and school for the students
६. वार्षिक मासिक तथा भीति पत्रिकाएं।
७. क्वीज प्रतियोगिताएं
८.खेल नायक
९. भ्रमण देशदर्शन
१०. विद्यालय आकाशवाणी
११. विद्यालय में स्वच्छता, व्यवस्था अनुशासन
१२. मेरा विद्यालय, मेरा देश प्रकल्प
१३. भिन्न-भिन्न विषयों के लिये प्रकल्प
१४. सामाजिक उत्पादक क्रियाएं
१५. एतिहासिक स्थलों,
१६ प्रदर्श स्थिर तथा क्रियाशील भवनों का सर्वेक्षण तथा लेखन
१७. स्वच्छ जल व्यवस्था
१८. साईकिल स्टेण्ड व्यवस्था
१९. सुझाव पेटिका. सुझाव पेटिका
२०. प्रश्न उत्तर पेटिका
२१. दैनन्दिनी
२२. प्रार्थना सभा संचालन
२३. स्काउटिंग एन.सी.सी., एन.एस.एस
संवाद
१. विद्यार्थियों का आपसी संवाद
२. आचार्यों का आपसी संवाद
३. आचार्यों का विद्यार्थियों से संवाद
४. प्रधानाचार्य तथा आचार्यों का पूर्व छात्रों से पत्र व्यवहार
५. प्रधानाचार्य तथा आचार्य का अभिभावकों से विचार विर्मश
६. व्यक्तिगत परामर्श विद्यार्थी, आचार्य, माता-पिता, प्रधानाचार्य द्वारा
आचार्यों में जीवन मूल्यों का सृजन
आचार्यों के लिये निम्नलिखित जीवन मूल्य अनिवार्य रूप से उनके जीवन का अंग बनने चाहिए :
१. विद्यार्थियों की भावनाओं तथा विचारों का आदर करना।
२. समय पालन
३. व्यवस्था प्रियता
४. आत्मानुशासन
५. स्वच्छता
६. नम्रता
७. संवदेनशीलता
८. पक्षपात रहित व्यवहार
९. स्वःप्रतिबद्धता व्यवसाय, विद्यार्थी, अभिभावक, समाज, देश इन सबके प्रति प्रतिबद्धता
१०. सहनशीलता
११. ज्ञान अर्जित करने की जिज्ञासा
१२. उदार मन
१३. प्रमाणिकता
१४. सहयोगियों के साथ मधुर सम्बन्ध
१५. टोली में पारस्परिक अनुकूल कार्य करना
१६. देशभक्ति
१७. सामाजिक चेतना
१८. सभी मतों के प्रति आदर भाव
१६. सहानुभूति
२०. सकारात्मक सोच
२१. प्रमाणिकता
२२. सत्यपालन
२३. पर्यावरण के प्रति जागरूकता
२४. गति अवरूद बालकों के प्रति सहानुभूति
२५. आचार्य प्रशिक्षण विद्यालय में मास के अन्तिम दिन विद्यालय में किया जाना चाहिए।
२६. काल अवधि के प्रशिक्षणों में आचार्यों को भेजना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
विषयों के साथ मूल्यों का समन्वय
● पाठन विषयों के साथ मूल्यों का संयोजन करना ।
● मूल्यों को भाषाओं के साथ जोड़ा जाए।
● विज्ञान विषयों में मूल्यों का संजोना सामाजिक अध्ययन की में मूल्यों का समन्वय
विशेष: मूल्य शिक्षा के लिये प्रथक से पुस्तक आवश्यकता नहीं।
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